बिशौल टटुआर, दरभंगा, बिहार — मिथिला का प्राचीन सिद्धपीठ
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर शिव विवाह का सम्पूर्ण व्यय वहन करें। यह एक अद्वितीय अवसर है — अपने परिवार के नाम से वर्ष लॉक करें और पुण्य के भागीदार बनें। कुल अनुमानित व्यय: ₹51,000 — न्यूनतम ₹1,000 एडवांस से वर्ष बुक करें।
उन श्रद्धालु भक्तों का हृदय से आभार, जिन्होंने मंदिर के विकास में अपना अमूल्य योगदान दिया।
🏡 बिशौल, टटुआर
🎁 सीलिंग पंखा
📅28 जून 2026
🏡 टटुआर
🎁 पंडा जी हेतु गैस सिलेंडर
📅14 जून 2026
🏡 बिशौल, टटुआर
🎁 एग्जॉस्ट पंखा
📅8 जून 2026
🏡 बिशौल, टटुआर
🎁शिव-पार्वती गठबंधन सूत्र (पाग धागा)
📅27 जुलाई 2026
शिवरात्रि पूजा समिति, बिशौल टटुआर — वार्षिक आय-व्यय 2026-27
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ॐ भगवान शिवकें नमस्कार ।। मिथिला नगरीमे विख्यात उत्तम हरिम कुलमे जन्म लेनिहार रघुदेव मिश्र समस्त पृथ्वी पर विख्यात भेलाह । इनक पुत्र पतंजलिक समान विद्वानमे श्रेष्ठ मोहन मिश्र नामें पृथ्वी पर प्रसिद्ध भेलाह, पछाति हुनको दू गोट पुत्र भेलैन्हि ।।१।।
तेकर हुनक अनुज, विनम्र शुद्ध बुद्धिक, न्याय आ धर्मशास्त्रमे पारंगत श्री सिद्धिनाथ छलाह । ओ बृहस्पतिए जकाँ विद्वान अपन पूजनीय पितासँ विद्या प्राप्तकए नित्य दिन भगवती जगदम्बिका आ भगवान शिवक चरण कमलमे भ्रमर सदृश रहैत छलाह ।।२।।
स्वच्छ कीर्तिरूपी पूर्णिमाक चन्द्रमा स्वरूप मिथिलाक अधिपति श्री श्री श्री रुद्र सिंहक सेवा कए हुनकासँ अभिलाषित पर्याप्त सम्पत्ति प्राप्त कए नर्मदा कुंडक मध्यसँ पार्वती पति महादेवक तीन गोट मूर्ति आनि अपन एहि गाममे मन्दिर बनबाए, लगहिमे पोखरि खुनबाए अनेकानक विद्वानक सहायतासँ क्रमशः ओही तीनू मूर्तिक स्थापना कएलैन्हि ।।३।।
ओहिमेसँ दुगट मूर्ति माता-पिताकें गिरिजापति भगवान शिवक सायुज्य मुक्ति प्राप्ति हेतु आ तेसर मूर्ति सकल अभिलाषित वस्तुक प्राप्ति हेतु । तीनू मूर्ति शाक 1763 मे चैत्र शुक्ल दशमी बृहस्पतिकें धर्मशास्त्रक विधि अनुसार स्थापित कएल गेल ।।४।। म०म० मोहन मिश्रक वंशजक द्वारा स्थापित पहिल एवं सभसँ प्राचीन देवालए (मन्दिर) इएह अछि ।
Rituals performed every morning and evening with full Vedic tradition and devotion.
Grand annual festival celebrated for 34+ years with Shiv Baraat, bhajan-kirtan, and Jalabhishek.
200+ devotees carry holy Ganga water from Simaria for sacred Abhishek every Mahashivratri.
Rare sacred idols brought from Narmada Kund — the origin of the holy Narmada river.
Devotees from across Mithila visit to fulfill their heartfelt wishes at this Siddha Peeth.
Solar lighting, public gatherings, and village development supported through the temple trust.
| Puja / Event | Time | Details |
|---|---|---|
| 🌅 Pratah Puja | 6:00 AM | Morning Abhishek & Aarti |
| ☀️ Madhyanha Puja | 12:00 PM | Bhog Offering |
| 🌇 Sandhya Aarti | 7:30 PM | Evening Aarti & Kirtan |
| 🎉 Mahashivratri | Annual | Grand Celebration — All Night |
* Timings may vary on special occasions. Contact us to confirm.
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